हिन्दू और हिन्दुत्व को लेकर देश मे काफी लंबे समय से
बहस रही और कई बार राजनीति मे इसका उपयोग वोटो की खेप तैयार करने के लिए किया गया तो
कभी सांप्रदायिकता को भड़काने के लिए किया गया | CAA और NRC तथा NPR से शुरू हुए गतिरोधों
ने इन शब्दो को आज सही से समझने की आवश्यकता पैदा की है |
किसी पार्टी या संघ की विचारधारा से प्रेरित न होकर
के हमने स्वतंत्र रूप से इस बात को जानने के कोशिश करी कि असल मे क्या मायने है
हिन्दू होने के और ये हिन्दुत्व है क्या ?
मै विश्लेषण से पूर्व एक
बात स्पष्ट कर देना चाहता हु कि ये पूरा विश्लेषण सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये
निर्णयो पर आधारित है किसी के व्यकतिगत विचार या किसी विशेष विचारधारा से प्रेरित
नहीं है |
सर्वप्रथम 1966 मे एक केस शास्त्री यांगना पुरुषाद
जी बनाम मूलदास वैश्य के केस मे सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया |
इस केस मे जो अपील कर्ता थे वे स्वामीनारायण
संप्रदाय को मानने वाले थे जिन्हे सतसंगी नाम से भी जाना जाता था इन्होने कोर्ट से
अपील करी कि स्वामीनारयन संप्रदाय हिन्दू
से अलग है इसलिए “the Bombay hindu places of public worship act
1956” स्वामीनारायन संप्रदाय पर लागू नहीं होता तथा इस एक्ट कि धारा
“तीन” के अंतर्गत स्वामीनारायन संप्रदाय के मंदिर नहीं आते अतः जो सतसंगी नहीं है उनका प्रवेश वर्जित रखा जाए
|
हाई कोर्ट ने इस मामले मे माना कि स्वामीनारायण
संप्रदाय पेशेवर हिन्दू है और “the Bombay hindu places of public worship
act 1956” इनके मंदिरो पर लागू होता है तथा अपील रद्द कर दी |
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट मे अपील की गयी :- सुप्रीम
कोर्ट ने अपने निर्णय मे कहा की जो विवाद है उसमे मूल प्रश्न यही है कि क्या
स्वामीनारायण संप्रदाय हिन्दू से अलग है जिस कारण उनके मंदिरो पर ये 1956 का एक्ट लागू नहीं होना चाहिए
?
इस प्रश्न के उतर को जानने के लिए हमे इस बात का
जवाब ढूँढना होगा कि हिन्दू क्या है ?
हिन्दू शब्द कि उत्पत्ति को लेकर कई अलग आलग अवधारणा
है पर जो अधिकतर शोधकर्ता मानते है उसके अनुसार हिन्दू शब्द कि उत्पत्ति सिंधु नदी
से हुई है जो कि पंजाब से बहती है | इसके आस पास
आर्यन जाति का निवास था |
मोनाईट विलियम के अनुसार ये आर्यन सेंट्रल एशिया से
आए थे जो पहाड़ो को पार करके सर्वप्रथम सिंधु नदी के आस पास बस गए | पारसी लोग इन्ही आर्यन लोगो को हिन्दू नाम से बोलने लगे |
The encyclopedia of religion
and ethics volume 6 के अनुसार Hinduism उस religion को बताया गया है जो भारतीय साम्राज्य मे बहुतायत से फैला हुआ है
|
Dr. radhakrishnan ने अपनी स्टडि मे ये पाया की
हिन्दू civilization के शुरुआती लोग सिंधु नदी के क्षेत्र मे
रहा करते थे मुख्यत दक्षिण पश्चिम और पंजाब मे तथा ये जानकारी ऋग्वेद मे भी मिलती
है |
तत्पश्चात सिंधु नदी के भारतीय क्षेत्र की तरफ रहने
वाले लोगो को पश्चिमी आक्रांताओ तथा पर्शियन लोगो द्वारा हिन्दू कहा जाने लगा और
यंही से हिन्दू शब्द की उत्पत्ति हुई |
इस तरह के कई refrences के बाद निर्णय
मे कहा गया कि जब हम हिन्दू धर्म कि बात करते है तो इसे परभाषित करना अत्यंत कठिन
है क्योकि ये धर्म न तो किसी एक पैगंबर मे विश्वास करते है,
न हे किसी एक भगवान को मानते है , न ही एक जैसी आस्थाए है और
न ही एक जैसे धार्मिक संस्कार है , न ही ये एक जैसे दर्शन मे
विश्वास रखते है |
किसी भी अन्य धर्म कि तरह के संकुचित और सीमित गुण
इसमे नहीं है इसलिए हिन्दू धर्म को साधारणत: केवल जीवन को जीने के तरीके के रूप मे
वर्णित किया जा सकता है |
डॉ राधाकृष्णन बताते है कि
कैसे Hinduism
उसके संपर्क मे आने वालो से रीति रिवाजो और गुणो को अपनी श्रेष्टता
हेतु स्वीकार कर लेता है | इस केस मे सुप्रीम कोर्ट ने
स्वामीनारायन संप्रदाय के मंदिरो मे किसी को
प्रवेश से वर्जित करने कि अपील को रद्द कर दिया |
इसके बाद साल 1976 मे commissinor
of wealth tax बनाम late
R shridharan के केस मे
निर्णय आया | जिसमे फिर हिन्दू के बारे मे बताया गया | इस केस के तथ्य इस प्रकार थे :-
- ·
R shridharan अपने पिता और भाइयो के
साथ रहते थे उनके पिता कि जायदाद का बंटवारा 1952 मे हुआ जिसमे उनके पास तीन कंपनी
व एक अन्य कंपनी के शेयर आए |
- ·
1954 मे श्रीधरन ने Austria मूल कि rosa के साथ विवाह किया जो कि special
marriage act 1954 के अंतर्गत हुआ | इस शादी
से उनका एक पुत्र हुआ nikolus shridharan
- ·
श्रीधरन income
tax , wealth tax आदि मे अपना staus
individual भरते थे पर 1962-63 मे अपना status हिन्दू undevided family भरा |
- ·
जिसे income
tax और wealth tax officials ने ये कहकर
अस्वीकार कर दिया कि shridhran कि शादी special marriage
act के अंतर्गत हुई है जिसकी धारा 21 के अनुसार आप पर hindu laws अप्लाई नहीं होते आपका अससेसमेंट indian sucession act से होगा न
कि हिन्दू sucession act से इसलिए आपको हिन्दू undevided
family का पार्ट नहीं बल्कि individual माना
जाएगा|
- ·
इसके खिलाफ श्रीधरन ने हाइ कोर्ट
मे अपील कि तो निर्णय श्रीधरन के पक्ष मे रहा और उसे हिन्दू undevided
family का पार्ट माना गया |
- ·
9 अप्रैल 1962 को श्रीधरन कि डैथ
हो जाती है श्रीधरन कि पत्नी ROSA उनके wealth tax रिटर्न के लिए आवेदन करती है जिसे commissnor wealth tax द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है और तर्क दिया जाता है कि shiridharan
को भले हिन्दू undevided family का भाग माना
गया हो पर ROSA को किसी भी case मे
हिन्दू नहीं माना गया है अतः ROSA पर हिन्दू laws अप्लाई नहीं होते तथा आपकी शादी special marriage act के अंतर्गत हुई है तो nikolus को पैतृक संपती के
अधिकार प्राप्त नहीं है |
·
ROSA ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे
अपील कि तो कोर्ट ने अपने निर्णय मे कहा कि यंहा मुख्य प्र्शन है कि क्या nikolus
हिन्दू है जिस पर हिन्दू laws अप्लाई हो सकते
है ?
कोर्ट ने nikolus को हिन्दू undevided
family का पार्ट न मानते हुए ROSA कि अपील
रद्द कर दी पर साथ ही अपने निर्णय मे हिन्दू के बारे मे कहा कि :-
हिन्दू को सटीकता के साथ परिभाषित करना बहुत कठिन
है और interational dictionary ऑफ इंगलिश के आधार पर hinduism
सांस्कृतिक , धार्मिक , और
सामाजिक व्यवहारों कि एक जटिल संरचना है | यह अत्यंत लचीला
धर्म है जिसमे किसी भी भगवान और मान्यताओ को मानने कि आजादी है |
इसके बाद 1996 मे डॉ YASHWANT
PRABHOO और बाला साब ठाकरे कि अपील दोनों पर साथ मे निर्णय दिया | जिसमे हिन्दुत्व शब्द के मतलब के साथ
सही उपयोग को लेकर बताया गया |
इस केस के तथ्य इस प्रकार थे :-
- ·
13 dec 1987
को महाराषट्र विधानसभा चुनावो मे dr प्रभू
मुंबई विले पार्ले सीट से कैंडिडैट थे | 14 dec 1987 को नतीजे आए तो डॉ प्रभू चुनाव जीत गए |
- ·
7 अप्रैल 1989 को बॉम्बे हाइ
कोर्ट ने people representation act 1951 कि धारा 100 sub section 1 clause (b) के तहत
उनका चुनाव रद्द कर दिया क्योकि उन्हे people representation act 1951 कि धारा 123 के subsection 3 और 3-ए के अंतर्गत CORRUPT
PRACTICE का दोशी पाया गया |
- ·
इस इलैक्शन के दौरान 9 dec 1987
तथा 29 nov 1987 को बाला साहब ठाकरे द्वारा dr
प्रभू के समर्थन मे रैलीयां
कि गयी थी जिसमे हिन्दू और हिन्दुत्व शब्दो का प्रयोग वोट मांगने के लिए हुआ और
यंहा तक कहा गया कि केवल हिन्दू dr प्रभू को वोट दें |
जब ये केस सुप्रीम कोर्ट मे पहुंचा तो सवाल यही था
कि क्या हिन्दू , हिन्दुत्व Hinduism आदि शब्दो का प्रयोग चुनावी रैलियो मे किया जा सकता है और ऐसा करना क्या
सही है ?
कोर्ट ने अपने निर्णय मे पुराने केसेस का हवाला
देते हुए कहा कि public speech मे दिये गए भाषण मे
कोई संदेहस्पद प्रसंग ना हो तो हिन्दुत्व का अर्थ भारतीय लोगो के जीवन जीने के
तरीके से लिया जाएगा न कि केवल उस धर्म को मानने वाले लोगो से |
कोर्ट ने अपने निर्णय मे कहा कि केवल हिन्दुत्व
शब्द का उपयोग करने से ये मान लेना कि ये स्पीच हिन्दू धर्म पर आधारित है और दूसरे
धर्मो के विपरीत ये कानूनी रूप से गलत एवं त्रुटिपूर्ण है
|
साथ ही कोर्ट ने कहा पब्लिक speech और रैलियो मे इन्हे प्रयोग किया जा सकता है परंतु इन शब्दो का उपयोग
सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के लिए करना गलत है |
अतः इस केस मे सुप्रीम कोर्ट
ने बाला साहब ठाकरे , डॉ prabhoo
आदि को चुनावो मे CORRUPT PRACTICE का दोषी करार दिया |
इस तरह इस देश मे हिन्दू और हिन्दुत्व को लेकर बड़ी
लंबी बहस रही है जिसे कोर्ट के निर्णयो के आधार पर सरल शब्दो मे आपके सामने रखने
की कोशिश हमने की | इस पूरे विवरण से जो मै समझ
पाया वो यही है कि शब्दो मे हिन्दू को परिभाषित करना कठिन है ये एक ऐसा लचीला धर्म
है जो हर उस अच्छाई को अपना लेने के क्षमता रखता है जो उस तक किसी भी माध्यम और
किसी के जरिये आ जाए अतः किसी वर्ग के साथ इसे जोड़ा नहीं जा सकता इसका scope
काफी विशाल है |
कल्पित हरित